आविन्यो important questions for class 10th Hindi

important questions for class 10th 


इस पोस्ट में आप लोगों को आविन्यो कहानी के प्रश्नों का उत्तर दिया जाएगा

प्रश्न 1. नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को क्या अनुभव होता है ? 

उत्तर- नदी के तट पर बैठे हुए लेखक को लगता है कि जल स्थिर है और तट ही बह रहा है । उन्हें अनुभव हो रहा है कि वे नदी के साथ बह रहे हैं । नदी । के पास रहने से लगता है कि स्वयं नदी हो गये हैं । स्वयं में नदी की झलक देखते हैं ।

प्रश्न 2. आविन्यों क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ? हर बरस आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है ? अथवा , आविन्यों में प्रत्येक बर्ष आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है?

 उत्तर – आविन्यों मध्ययुगीन ईसाई मठ है । यह दक्षिणी फ्रांस में अवस्थित है । आविन्यों फ्रांस का एक प्रमुख कलाकेंद्र रहा है । यहाँ गर्मियों में फ्रांस और यूरोप का एक अत्यंत प्रसिद्ध और लोकप्रिय रंग – समारोह प्रतिवर्ष होता है ।

 प्रश्न 3. नदी तट पर लेखक को किसकी याद आती है और क्यों ? – अथवा , आविन्यो पाठ के लेखक को नदी तट पर किसकी याद आती है । और क्यों?

उत्तर- नदी तट पर लेखक को विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता याद आती | है । क्योंकि लेखक नदी तट पर बैठकर अनुभव करते हैं कि वे स्वयं नदी हो गये | हैं । इसी बात की पुष्टि करते हुए शुक्ल जी ने ” नदी – चेहरा लोगों ” से मिलने जाने की बात कहते हैं ।

प्रश्न 4. किसके पास तटस्थ रह पाना संभव नहीं हो पाता और क्यों ?

उत्तर- नदी के किनारे और कविता के पास तटस्थ रह पाना संभव नहीं हो पाता । क्योंकि दोनों की अभिभूति से बची नहीं जा सकती । नदी और कविता में हम बरबस ही शामिल हो जाते हैं । निरन्तरता नदी और कविता दोनों में हमारी । नश्वरता का अनन्त से अभिषेक करती है ।

 प्रश्न 5. इस कविता से आप क्या सीखते हैं ?

उत्तर- यह कविता हमें धैर्य की पाठ पढ़ाती है । हमें प्रत्येक स्थिति में स्थिरता – कायम रखना चाहिए । अपनी प्राचीनता को निरंतर बनाए रखें । प्राचीन अस्मिता नष्ट न हो ऐसा प्रयास किया जाय । कामनाएँ , कल्पनाएँ नवीन स्वप्न को साकार करने की बाट जोहें । जीवन में प्रतीक्षारत रहें । हमारा जीवन धैर्यवान , रचनाशील , व्यापक एवं कवित्वपूर्ण है । आशा और विश्वास के साथ जीवन व्यतीत करने की सीख मिलती है ।

 प्रश्न 6. लेखक आविन्यों क्या साथ लेकर गए थे और वहाँ कितने दिनों तक रहे ? लेखक की उपलब्धि क्या रही ?

 उत्तर- लेखक आविन्यों में उन्नीस दिनों तक रहे । वे वहाँ अपने साथ हिंदी का टाइपराइटर , तीन – चार पुस्तकें और कुछ संगीत के टेप्स ही ले गए थे । वे उस निपट एकांत में अपने में और लेखन में डूबे रहे । लेखक की उपलब्धि यही रही कि उन्होंने उन्नीस दिनों में पैंतीस कविताएँ और सत्ताईस गद्य रचनाएँ लिखीं ।

 प्रश्न 7. नदी और कविता में लेखक क्या समानता पाता है ? 

उत्तर – जिस प्रकार नदी सदियों से हमारे साथ रही है उसी प्रकार कविता भी मानव की जीवन – संगिनी रही है । नदी में विभिन्न जगहों से जल आकर मिलते हैं । और वह प्रवाहित होकर सागर में समाहित होते रहते हैं । हर दिन सागर में समाहित होने के बावजूद उसमें जल का टोटा नहीं पडता । कविता में भी विभिन्न विडम्बनाएँ , । शब्द भंगिमा , जीवन छवियाँ और प्रतीतियाँ आकर मिलती और तदाकार होती रहती हैं । जैसे नदी जल – रिक्त नहीं होती , वैसे ही कविता शब्द – रिक्त नहीं होती । इस प्रकार नदी और कविता में लेखक अनेक समानता पाता है ।


प्रश्न 8. मनुष्य जीवन से पत्थर की क्या समानता और विषमता है ? ( TBO )

उत्तर- मानवीय जीवन में सुख और दुःख के समय व्यतीत होते हैं । जीवन परिवर्तनशील पथ पर अग्रसर होता है । मानव उतार – चढ़ाव देखता है । पत्थर भी मानव की तरह परिवर्तनशील समय का सामना करता है । पत्थर भी शीत और ताप दोनों का सान्निध्य पाता है । मानव अपनी प्राचीन गाथा को गाता है । पत्थर भी प्राचीनता को अपने में सहेजे रखता है । मानव अपनी भावनाओं को प्रकट करता है । अपने अनुभव को व्यक्त करता है । परन्तु पत्थर मूक रहता है । हर स्थिति से गुजरते हुए अभिव्यक्त नहीं करता है । मनुष्य की कविता में शब्द होते हैं लेकिन पत्थर नि : शब्द कविता रचता है । मनुष्य झुककर नमन करता है लेकिन पत्थर बिना माथा झुकाए प्रार्थना करता है । इस प्रकार मनुष्य जीवन से पत्थरों की समानता और विषमता दोनों है । 

प्रश्न 9. ला शत्रूज का अंतरंग विवरण अपने शब्दों में प्रस्तुत करते हुए । यह स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने उसके स्थापत्य को ‘ मौन का स्थापत्य क्यों कहा है ? 

उत्तर- रोन नदी के दूसरी ओर ‘ वीलनव्व ल आविन्यों ‘ अर्थात् आविन्यों का नया गाँव या नई बस्ती है । वहाँ फ्रेंच शासकों ने पोप की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक किला बनवाया था । उसी में काथूसियन संप्रदाय का एक ईसाई मठ निर्मित हुआ । उसे ला शत्रूज के नाम से जाना जाता है । चौदहवीं शताब्दी से अठारहवीं सदी के मध्य तक इसका धार्मिक उपयोग होता रहा । बीसवीं सदी के प्रारंभ में इस मठ का जीर्णोद्धार किया गया और इसमें एक कलाकेंद्र की स्थापना की गई । यह केंद्र लेखन और रंगमंच से जुड़ा हुआ है । नाटककार , अभिनेता , रंगसंगीतकार , रंगकर्मी आदि यहाँ आते हैं और ईसाई संतों के चैंबर्स में रहकर रचनात्मक कार्य करते हैं । यहाँ फर्नीचर चौदहवीं सदी जैसे हैं , पर नहानघर और रसोईघर अत्याधुनिक है । सप्ताह के पाँच दिन , शाम में , सबको एक साथ भोजन करने की सुविधा है । यह अत्यंत शांत और नीरव स्थान है । कार्थसियन संप्रदाय मौन में विश्वास करता था । अतः , इस ईसाई मठ का स्थापत्य कुछ ऐसा है कि इसे देखकर लगता है जैसे इसके चप्पे – चप्पे में मौन और चुप्पी का निवास हो।

प्रश्न 10 . ( 1 ) लेखक आविन्यों किस सिलसिले में गए थे ? वहाँ उन्होंने क्या . देखा – सुना ? 


( ii ) ला शत्रूज क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ? आजकल उसका क्या उपयोग होता है ?

उत्तर -(1) लेखक को आविन्यों के कलाकेंद्र में पीटर कुक द्वारा की जा रही । ‘ महाभारत ‘ की प्रस्तुति में दर्शक की हैसियत से आमंत्रित किया गया था । पत्थरों की एक खदान में , आविन्यों के कुछ किलोमीटर दूर पीटर क्रुक के विवादास्पद ‘ महाभारत ‘ का प्रस्तुतीकरण किया गया था । वह प्रस्तुति सच्चे अर्थों में भव्य और महाकाव्यात्मक थी । लेखक ने देखा कि गर्मियों में आविन्यों के अनेक चर्च और । पुरातन ऐतिहासिक महत्त्व के स्थान रंगस्थल में बदल जाते हैं ।
  ( 2 ) ला शत्रूज काथूसियन संप्रदाय का एक ईसाई मठ है । यह ‘ वीलनव्व ल आविन्यों ‘ ( अर्थात आविन्यों का नया गाँव ) में अवस्थित है जो रोन नदी के दूसरी ओर है और लगभग स्वतंत्र है । आजकल इसका उपयोग एक कलाकेंद्र के रूप में | होता है । यह केंद्र आजकल रंगमंच और लेखन से जुड़ा हुआ है । यहाँ नाटककार , अभिनेता , गीत – संगीतकार , रंगकर्मी आदि आते हैं और पुराने ईसाई संतों के चैंबर्स में रहकर रचनात्मक लेखन करते हैं ।

कहानी का नाम:। आविन्यो
लेखक का नाम:। अशोक अशोक बाजपाई
पाठ्य संख्या:।  9

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