नागरी लिपि IMPORTANT QUESTIONS FOR CLASS 10Th hindi

IMPORTANT QUESTIONS FOR CLASS 10TH

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इस पोस्ट में आप लोगों को नागरी लिपि कहानी के प्रश्नों का उत्तर दिया जाएगा।

Q1. देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएं लिखी जाती है? 

 = देवनागरी लिपि में मुख्यतः नेपाली, मराठी, संस्कृत, प्राकृत और हिंदी भाषा में लिखी जाती हैं।

Q2. लेखक ने किन भारतीय लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है?

= लेखक ने गुजराती, बांग्ला, और ब्रह्मी लिपियों से देवनागरी का संबंध बताया है।

Q3. नागरी लिपि के आरंभिक लेख कहां प्राप्त हुए हैं? उनके विवरण दें।

= विद्वानों के अनुसार नागरी लिपि के आरंभिक लेख विंध्य पर्वत के नीचे के ढक्कन प्रदेश से प्राप्त हुआ है। 

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Q4. नागरी लिपि कब एक सर्वदेसिक लिपि थी? 

= ईशा की आठवीं 11वीं सदियों में नागरी लिपि पूरे देश में व्याप्त थी। अंत: उस समय यह एक सर्वदेसिक लिपि थी। 

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Q5. देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आई है? 

= करीब 2 सदी पहले पहली बार देवनागरी लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तके छपने लगी। इस प्रकार हीं देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता आई है। 

Q6. उत्तर भारत में किन शासकों के प्राचीन नागरी लेख प्राप्त होते हैं? 

= विद्वानों का विचार है कि उत्तर भारत में मिहिरभोज, महेंद्र पाल, आप भी गुर्जर प्रतिहार राजाओं के अभिलेख में पहले पहल नागरी लिपि के लेख प्राप्त होते हैं।

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Q7. गुर्जर प्रतिहार कौन थे? पठित पाठ के आधार पर बताए।

= विद्वानों का विचार है कि गुर्जर प्रतिहार बाहर से भारत आए थे। ईशा की आठवीं सदी के पूर्वार्द्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने अपना शासन स्थापित किया। अब बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था। मिहिरभोज, महेंद्र पाल, आदि प्रख्यात प्रतिहार शासक हुए।

Q8. ब्रह्मी और सिद्धांम लिपि की तुलना में नागरी लिपि की मुख्य पहचान क्या है? 

=गुप्त काल की ब्रह्मी लिपि तथा उसके बाद की सिद्धाम लिपि के अक्षरों के सिरों पर छोटी आडी लकीरे या छोटे ठोस त्रिकोण है। लेकिन नागरी लिपि की मुख्य पहचान यह है कि इसके अक्षरों के सिरों पर पूरी लकीरे बन जाती हैं। और यह सिरो रेखाएं उतनी ही लंबी रहती है। जितने की अक्षरों की चौड़ाई होती है।

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Q9. नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं? लेखक इस संबंध में क्या बताते हैं? पठित पाठ के आधार पर बतावे। 

= नागरी नाम की उत्पत्ति तथा इसके अर्थ के बारे में विद्वानों में बड़ा मतभेद है। एक मत के अनुसार गुजरात के नगर ब्राह्मणों ने पहले-पहल नागरी लिपि का इस्तेमाल किया। इसलिए इसका नाम नागरी पड़ा। एक दूसरे मत के अनुसार बाकी नगर सिर्फ नगर हैं, परंतु काशी देवनागरी है। इसलिए काशी में प्रयुक्त लिपि का नाम देवनागरी पड़ा।

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Q10. नागरी लिपि के साथ-साथ किनका जन्म होता है? इस संबंध में लेखक क्या जानकारी देते हैं? 

= नागरी लिपि के साथ-साथ अनेक प्रदेशिक भाषाओं ने भी जन्म लिया है। आठवीं नवमी सदी से प्रारंभिक हिंदी का साहित्य मिलने लग जाता है। हिंदी के आदि कवि सरहपाद के दोहा कोश की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है 10वीं-11वीं सदी की लिपि में लिखी गई है। नेपाल से और भारत के जैन-  भंडारों से भी इस काल की बहुत सारी हस्त लिपियां मिली हैं। इसी काल में आर्य भाषा परिवार की आधुनिक भाषाएं मराठी, बांग्ला आदि जन्म ले रही थीं।

Q11. नंदी नागरी किसे कहते हैं? किस प्रसंग में लेखक ने उसका उल्लेख किया है?

= कुछ समय पहले तक दक्षिण भारत में पोथियां लिखने के लिए नागरी लिपि का व्यवहार होता था। दरअसल नागरी लिपि के आरंभिक लेख दक्षिण भारत से ही मिले हैं। दक्षिण भारत की यह नागरी लिपि नंदी नागरि कहलाती थी। कोकन के सिलहर, मान्यखेट के राष्ट्रकूट, देवगिरि के यादव तथा विजयनगर के शासकों के लेख नंदी नागरी लिपि में है। पहले-पहल विजयनगर के राजाओं के लेखों की लिपि को ही नंदी नागरी लिपि नाम दिया गया था।

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Q12. नागरि की उत्पत्ति के संबंध में लेखक का क्या कहना है? पटना से नागरि का क्या संबंध लेखक ने बताया है? 

= यह मान्य है कि नागरी लिपि किसी नगर अर्थात किसी बड़े शहर से संबंधित है। पादताडितकमृ नामक एक नाटक से जानकारी मिलती है कि पाटलिपुत्र अर्थात पटना को नगर नाम से पुकारते थे। अंत: हम यह भी जानते हैं कि स्थापत्यकि उत्तर भारत की एक विशेष शैली को नगर शैली कहते हैं।

Q13. निबंध के आधार पर कला-क्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करें।

= निबंध के आधार पर कला क्रम से नागरी लेखों से संबंधित प्रमाण इस प्रकार मिलते हैं-11 वीं सदी में राजेंद्र जी से प्रतापी चेर राजाओं के सिक्कों पर नगर अक्षर देखने को मिलते हैं। 12 वीं सदी के केरल के शासकों के सिक्कों पर ‘वीर केरलस्य’ जैसे शब्द नागरी लिपि में अंकित हैं। दक्षिण से प्राप्त वरगूण का पलयम ताम्रपत्र भी नागरी लिपि में नौवीं सदी की है।
1000 ईसवी के आसपास मलवा नगर में नगर लिपि का इस्तेमाल होता था। विक्रमादित्य के समय पटना में देवनागरी का प्रयोग मिलता है। ईशा की 8वीं से 11वीं सदियों में नागरी लिपि पूरे भारत में व्याप्त थी। 8वीं सदी में दोहा कोश की तिब्बत से जो हस्तलिपि मिली है, वाह नागरी लिपि में है। 754 ईसवी में जैन गणितज्ञ महावीरचार्य के गणित सार संग्रह की रचना मिलती है। जो नागरी लिपि में है।

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