शिक्षा और संस्कृति important questions for class 10th

important questions for class 10th


इस पोस्ट में आप लोगों को शिक्षा और संस्कृति कहानी के प्रश्नों का उत्तर दिया जाएगा

प्रश्न 1. गांधीजी बढ़िया शिक्षा किसे कहते हैं?

उत्तर- अहिंसा प्रतिरोध को गांधी जी बढ़िया शिक्षा कहते हैं। यह शिक्षा इंसान को अक्षर ज्ञान से भी पूर्व ( पहले )  मिलना चाहिए। 

प्रश्न 2. इंद्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग सीखना क्यों जरूरी है ?
 उत्तर- इन्द्रियों का बुद्धिपूर्वक उपयोग उसकी बुद्धि के विकास का जल्द – से – जल्द और उत्तम तरीका है ।
प्रश्न 3. शिक्षा का ध्येय गाँधीजी क्या मानते थे और क्यों?
उत्तर- शिक्षा का ध्येय गाँधीजी चरित्र – निर्माण करना मानते थे । उनके विचार से शिक्षा के माध्यम से मनुष्य में साहस , बल , सदाचार जैसे गुणों का विकास होना चाहिए , क्योंकि चरित्र – निर्माण होने से सामाजिक उत्थान स्वयं होगा । साहसी और सदाचारी व्यक्ति के हाथों में समाज के संगठन का काम आसानी से सौंपा जा सकता है ।
 प्रश्न 4. मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास कैसे संभव है ?  
उत्तर- शिक्षा का प्रारंभ इस तरह किया जाए कि बच्चे उपयोगी दस्तकारी सीखें और जिस क्षण से वह अपनी तालीम शुरु करें उसी क्षण उन्हें उत्पादन का काम करने योग्य बना दिया जाए । इस प्रकार की शिक्षा – पद्धति में मस्तिष्क और आत्मा का उच्चतम विकास संभव है ।

प्रश्न 5. गाँधीजी देशी भाषाओं में बड़े पैमाने पर अनुवाद – कार्य क्यों आवश्यक मानते थे ?
उत्तर – गाँधीजी का मानना था कि देशी भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से किसी भी भाषा के विचारों को तथा ज्ञान को आसानी से ग्रहण किया जा सकता है । अंग्रेजी या संसार के अन्य भाषाओं में जो ज्ञान – भंडार पड़ा है , उसे अपनी ही मातृभाषा के द्वारा प्राप्त करना सरल है । सभी भाषाओं से ग्राह्य ज्ञान के लिए अनुवाद की कला परमावश्यक है । अतः इसकी आवश्यकता बड़े पैमाने पर है ।
 प्रश्न 6. गाँधीजी किस तरह के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं और क्यों ? 
उत्तर गाँधीजी भिन्न – भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य को भारत के लिए बेहतर मानते हैं , क्योंकि भिन्न – भिन्न संस्कृतियों के सामंजस्य भारतीय जीवन को प्रभावित किया है और स्वयं भी भारतीय जीवन से प्रभावित हुई है । यह सामंजस्य कुदरती तौर पर स्वदेशी ढंग का होगा , जिसमें प्रत्येक संस्कृति के लिए अपना उचित स्थान सुरक्षित होगा ।

 प्रश्न 7. दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की गहरी समझ क्यों जरूरी है ?
उत्तर – दूसरी संस्कृतियों की समझ और कद्र स्वयं अपनी संस्कृति की कद्र होने और उसे हजम कर लेने के बाद होनी चाहिए , पहले हरगिज नहीं । कोई संस्कृति इतने रन – भण्डार से भरी हुई नहीं है जितनी हमारी अपनी संस्कृति है । सर्वप्रथम हमें अपनी संस्कृति को जानकर उसमें निहित बातों को अपनाना होगा । इससे चरित्र – निर्माण होगा जो संसार के अन्य संस्कृति से कुछ सीखने की क्षमता प्रदान करेगा ।
प्रश्न 8. अपनी संस्कृति और मातृभाषा की बुनियाद पर दूसरी संस्कृतियों और भाषाओं से संपर्क क्यों बनाया जाना चाहिए ? गाँधीजी की राय स्पष्ट कीजिए ।
 उत्तर – गाँधीजी के विचारानुसार अपनी मातृभाषा के माध्यम बनाकर हम अत्यधिक विकास कर सकते हैं । अपनी संस्कृति के माध्यम से जीवन में तेज गति से उत्थान किया जा सकता है । लेकिन हम कूपमंडूक नहीं बनें । दूसरी संस्कृति की अच्छी बातों को अपनाने में परहेज नहीं किया जाय । बल्कि अपनी संस्कृति एवं भाषा को आधार बनाकर अन्य भाषा एवं संस्कृति को भी अपने जीवन से युक्त करें ।
 प्रश्न 9. गाँधीजी कताई और धुनाई जैसे ग्रामोद्योगों द्वारा सामाजिक क्रांति कैसे संभव मानते थे ? 
 उत्तर- कताई और धुनाई जैसे ग्रामोद्योगों के संबंध में गाँधीजी की कल्पना थी कि यह एक ऐसी शांत सामाजिक क्रांति की अग्रदूत बने । जिसमें अत्यंत दूरगामी परिणाम भरे हुए हैं । इससे नगर और ग्राम के संबंधों का एक स्वास्थ्यप्रद और नैतिक आधार प्राप्त होगा और समाज की मौजूदा आरक्षित अवस्था और वर्गों के परस्पर विषाक्त संबंधों की कुछ बड़ी – से – बड़ी बुराइयों को दूर करने में बहुत सहायता मिलेगी । इससे ग्रामीण जन – जीवन विकसित होगा और गरीब – अमीर का अप्राकृतिक भेद नहीं रहेगा ।
प्रश्न 10. आज की शिक्षा पद्धति कैसी होनी चाहिए।
उत्तर- आज की शिक्षा में गांधीजी के अनुसार कोई हस्तकला (दस्तकारी) शिक्षा का माध्यम होना चाहिए। शिक्षा में हस्तकला कोई यांत्रिक रूप में ना सिखा कर वैज्ञानिक रूप में सिखाया जाना चाहिए।
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कहानी का नाम:। शिक्षा और संस्कृतिलेखक का नाम:। महात्मा गांधीपाठ्य संख्या:।  12

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