Essay on Hindi in my favourite teacher

Essay on Hindi in  my favourite teacher

इस पोस्ट में आप लोगों को मेरे प्रिय शिक्षक/ आदर्श अध्यापक पे लेख मिलेगा। यह लेख कक्षा 10 के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। यह प्रश्न
(मेरे प्रिय शिक्षक/आदर्श अध्यापक) कक्षा 10 के बोर्ड एग्जाम (MATRIC) में 10 अंकों का पूछा जाता है।

इस पोस्ट में निम्न बिंदुओं पर विचार किया गया है।

  • भूमिका
  • शिक्षक का परिचय
  • सर्वप्रियता का आधार
  • अध्ययनशीलता 
  • जो माता-पिता दोनों का प्यार दें
  • चरित्रवान
  • आज अध्यापक की दशा
  • उपसंहार

भूमिका – अध्यापक हमारे समाज के सम्मानित व्यक्ति होते हैं । अध्यापक छात्र अथवा शिष्य का मार्गदर्शक तथा व्यक्तित्व निर्माण करने वाला होता है । किन्तु , हरेक व्यक्ति अध्यापक नहीं बन सकता । अध्यापक वही हो सकता है जिसका कर्म आदर्श | हो । और , ऐसा व्यक्ति आदर्श अध्यापक कहला सकता है ।

शिक्षक का परिचय- मेरे प्रिय अध्यापक श्री राज आनंद जी
” सादा जीवन उच्च । विचार ” में विश्वास रखते हैं । वे सदैव खादी के वस्त्र पहनते हैं और पूर्णत : शाकाहारी हैं । उनके विचार बहुत उच्च हैं । वे मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाने के पक्षपाती हैं । जाति – पांति से उन्हें सख्त घृणा है । वे सभी को एकसमान मानते हैं और उनसे प्रेममय व्यवहार करते हैं । उन्होंने दर्शनशास्त्र का भी गहन अध्ययन कर रखा है । वे हमें महान दाशानका क विचारों से अवगत कराते रहते हैं । उनकी बातें हम बहुत ध्यानपूर्वका सुनते हैं ।

सर्वप्रियता का आधार-। मेरे प्रिय अध्यापक श्री राज आनंद जी बहुत ही अनुशासन प्रिय हैं । उन्हें अनुशासनहीनता से सख्त नफरत है । वे किसी भी कीमत पर विद्यालय में उच्छृखलता सहन नहीं कर सकते । उन्हें समय की पाबंदी बहुत प्रिय है । विलंब से आने वाले छात्रों को वे दंडित करने से भी नहीं चूकते । उनके इन प्रयासों के सुखद परिणाम सभी के सामने आ रहे हैं । वे कभी सस्ती लोकप्रियता के चक्कर में नहीं पड़ते । श्री वर्मा जी अपने विषय के प्रकांड विद्वान हैं । वो इतिहास के बहुत बड़े ज्ञाता हैं। वह इतिहास के विषय को पूरे संदर्भ सहित समझाते हैं। उन्हें इतिहास के अनेक पाठ स्मरण है। प्रसंगानुकूल वे उन्हें सुनाकर पाठ को रोचक बना देते हैं। उनके पढ़ानेेेे के ढंग से ही पाठ का मूल भाव स्पष्ट हो जाता है।
वाह पाठ को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से समझाते हैं।
                                  मेरे प्रिय अध्यापक हमारी दैनिक समस्याओं को सुलझा ने में अत्यंत रुचि लेते हैं। हम उन्हें सच्चा मार्गदर्शक मानते हैं। बे हमारे साथ स्नेहमय एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करते हैं। सभी विद्यार्थी उन्हें अपना समझते हैं। विद्यार्थियों में वे अत्यंत लोकप्रिय हैं।

अध्ययनशीलता– आदर्श अध्यापक वही है जो स्वयं अध्ययनशील हो । तभी उसका शिष्य भी अध्ययनशील हो सकता है । जब तक व्यक्ति स्वयं
अध्ययनशील ना हो तब तक वो अध्यापन नहीं कर सकता । क्योंकि, विषय की सार्थकता जाने बिना अध्यापन करना सफल नहीं हो पाता और विषय की सार्थकता जानने के लिए अध्ययन करना आवश्यक है। इस प्रकार अध्ययनशीलता अध्यापक का लक्षण है।

जो माता-पिता दोनों का प्यार दें- अध्यापन में प्रेम लगन की आवश्यकता होती है। आदर्श अध्यापक अपनेेे शिष्यों के प्रति अपने पूर्ण होते हैं। शिष्य को आदर्श अध्यापक के निकट अपने माता-पिता का प्यार मिलनेेेे पर अध्यापन का सत प्रतिशत प्रभाव पड़ता है।
                               

चरित्रवान- मेरे अध्यापक इतने चरित्रवान है कि हमारे विद्यालय के अधिकांश विद्यार्थी तथा शिक्षक इनका आचरण अपनाते हैं। वे सभी से प्रेम से बातचीत करते हैं। गरीबों की सहायता करते हैं।
उनको अपनी नियमित आय के अतिरिक्त उनमें विशेष लाभ का लालच बिल्कुल नहीं है। सभी विद्यार्थी उनके आचरण से बहुत प्रभावित हैं।


आज अध्यापक की दशा – आज अध्यापक तथा शिष्य का संबंध व्यापारिक हो गयाा है। अध्यापक स्कूल में कम तथा  कोचिंग संस्थानों में अधिक समय देतेे हैं। इतना ही नहीं, अध्यापन का स्तर तथा अवसर भी गिर गया है। इसलिए अध्यापकों का सम्मान भी औपचारिक ही रह गया है।

उपसंहार- आदर्श अध्यापक के अभाव में आज शिक्षा का स्तर भी गिर गया है। आदर्श अध्यापक और शिक्षा एक दूसरे के पर्याय होतेे हैं। इसलिए, अध्यापकों को आदर्श का अनुकरण करनाा चाहिए।

मेरे प्रिय शिक्षक श्री राज आनंद जी

मेरे आदर्श शिक्षक- श्री राज आनंद जी
प्रभारी- शिवदानी अयोध्या इंटर विद्यालय गोपालपुर (नवादा)

✍️WRITER–RUDRA RAJ

Essay on Hindi in  my favourite teacher

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यह लेख कक्षा 10 के विद्यार्थियों के लिए अति महत्वपूर्ण है।

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